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Saturday, 13 August 2011

मंझिल

हम हो..
तुम हो..
राहे थोडी .
मुश्कील हो..
हौसले हो..
जिगर हो..
मंजिले दूर हो ..
आप हम सफर हो ..
हाथ में हाथ हो..
तो ..
खुशी कैसे ..
दूर हो ?

@राम मोरे/१४०८२०११/०६०८ स..

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