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Wednesday, 24 August 2011

ताज महल

अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता!
तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता!
यह तो करिश्मा है मोहब्बत का!
वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता !

एक अज्ञात गझलगावकर /सचिन आडगावकर यांचे कडून साभार ..........

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